मैं और मेरी केतली
रवि के दिन कि शुरूआत चाय के केतली से होती है। क्योंकि रबि एक चाय वाला है, चाय
ही उसका सब कुछ है । सुरज उगने से पहले वह
अपनी केतली को चूल्हे पर चङा देता है,तकि सुबह ठंङ के कारण चाय अधिक से अधिक बेच
सके । सुबह कि चाय बेचने के बाद वह अलग-अलग ऑफिसों में चाय देने का काम करता है, जब
राबि ऑफिसों मे चाय देने जाता है तो सोचता है कि काश कभी वह भी कुर्सी पर बैठ कर कागज
कलम चला पाता, पर यह सब उसके नसीब मे कहां, उसके नसीब में तो चाय बेचना ही लिखा है
।
राबि झुग्गियों मे रहता है और वहां उसके साथ उसके
माता-पिता और एक छोटी बहन रहती है। राबि कि मां उसको जन्म देने के बाद ही मर गई थी
और अब वह अपनी सौतेली मां के साथ रहता है। राबि स्कूल नही जाता और वह अपने पिता के साथ काम में हाथ बटाता है और
शाम को जब थका हुआ घर आता है तो रूखी-सूखी खा कर सो जाता है, और सूबह होते ही शुरु
हो जाती है उसकी रोज़ की भागदौड़ ।
कई सरकारें आईं और गईं पर रबि
और उसके पिता आज भी चाय बेचते हैं, जब हमने उन से यह पूछने कि कोशिश की कि नई
सरकार आने से आप को उन से क्या उम्मीदें हैं,
तो उन्होंने कहा कि महंगाई कम हो जिनसे आम आदमी की रोज़मर्रा की जरुरतें आसानी से पूरी
हो सकें।
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मेंरा क्या होगा भविष्या
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